रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान ने दुश्मनों के मुक़ाबले में गुप्तचर व सुरक्षा मैदानों में सशक्त कार्यवाहियां की हैं और बहुत सी साज़िशों को सफलता के साथ नाकाम बनाया है। ईरान के गुप्तचर मंत्री सैयद महमूद अलवी ने इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करके बताया है कि पिछले एक साल में तकफ़ीरी आतंकियों की 114, एमकेओ के आतंकियों की 116, क्रांति विरोधियों की 4 और मादक पदार्थों के तस्करों की 380 टीमों से मुक़ाबला किया है। उन्होंने बताया कि गुप्तचर मंत्रालय के कर्मियों ने ईरान समेत दुनिया के विभिन्न देशों में सैकड़ों जासूसों की पहचान की है और मित्र देशों की गुप्तचर सेवाओं के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान के दौरान सीआईए के अनेक एजेंटों की पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार किया है।
ईरान को हालिया बरसों में विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। गुप्तचर मंत्री का कहना है कि अमरीका व ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवाएं प्रत्यक्ष रूप से मैदान में आ गई हैं और वे ईरान में आतंकी टीमों का पोषण व समर्थन कर रही हैं। उन्होंने आतंकियों के लिए इस प्रकार के हालात पैदा कर दिए हैं कि वे आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग के अलावा, जासूसी का प्रशिक्षण भी हासिल करते हैं कि किस तरह अपने संपर्कों, आवाजाही और संपर्कों को गुप्तचर विभाग की नज़रों से छिपा कर रखे। इन ख़तरों और आतंकी टीमों की गतिविधियों में विस्तार के दृष्टिगत ईरान ने भी आतंकी टीमों और जासूसों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अपने काम का दायरा बढ़ा दिया है।
आज लड़ाइयां अत्यंत जटिल मैदानों में पहुंच चुकी हैं और इनसे निपटने के लिए पूरी तरह से चौकन्ना और पूर्ण रूप से सूचित रहने की ज़रूरत है। दुश्मनों के एजेंटों के मुक़ाबले में ईरान के गुप्तचर विभाग की चेतना इस दृष्टि से काफ़ी अहम है। क्षेत्र में दुश्मनों का एक मुख्य लक्ष्य संकट खड़ा करना और क्षेत्रीय राष्ट्रों को आपस में लड़ाना है। इसके लिए वे सुरक्षा, सूचना, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के क्षेत्रों में झूठे संकट खड़े करते हैं। वास्तव में यह नर्म युद्ध का एक अहम भाग है और इसी वजह से इस संबंध में ईरान के गुप्तचर विभाग की भूमिका बहुत अहम है।